विश्व ब्रेन दिवस के अवसर पर सामने आई रिपोर्ट ने चिंताजनक स्थिति उजागर की है। न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरो सर्जनों के अनुसार छत्तीसगढ़ के 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 30 प्रतिशत युवा किसी न किसी ब्रेन संबंधी बीमारी से प्रभावित हैं। पहले स्ट्रोक, माइग्रेन और ब्रेन फॉग जैसी समस्याएं अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थीं। अब 30 से 45 वर्ष के लोगों में भी ये बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार बदलती जीवनशैली इसका प्रमुख कारण बन रही है। तनाव, अनियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद की कमी भी जोखिम बढ़ा रही है। लंबे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी समस्या को गंभीर बना रही है। डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल समेत कई निजी अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों ने शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है। समय पर जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, नियमित व्यायाम करने और संतुलित आहार लेने की भी सलाह दी गई है। Source: Source Post navigation थैलेसीमिया मरीजों की मदद के लिए आरती ग्रुप ने सीएसआर के तहत दिए 11 लाख रुपये