मानसून के दौरान मच्छरों के बढ़ने के साथ जापानी इंसेफेलाइटिस का खतरा भी बढ़ जाता है। यह बीमारी संक्रमित मच्छर के काटने से फैलती है और मस्तिष्क में सूजन पैदा कर सकती है। न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार यह संक्रमण धीरे-धीरे दिमाग पर गंभीर असर डाल सकता है। 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे इस बीमारी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील माने जाते हैं। शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे बुखार, सिरदर्द और कमजोरी की तरह दिखाई दे सकते हैं। इसी वजह से कई बार बीमारी की पहचान समय पर नहीं हो पाती। संक्रमण बढ़ने पर दौरे पड़ना, बेहोशी, मानसिक भ्रम और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और सही इलाज से गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है। लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इस बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। इसके साथ ही मच्छरों की रोकथाम, साफ-सफाई और पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने जैसी सावधानियां भी जरूरी हैं। जागरूकता और समय रहते बचाव ही जापानी इंसेफेलाइटिस से सुरक्षा का सबसे बेहतर तरीका है।

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