मुंबई विश्वविद्यालय द्वारा छात्र प्रवेश क्षमता में कटौती और जुर्माना लगाए जाने के फैसले को कई विधि महाविद्यालयों ने चुनौती दी है। इस मामले को लेकर कॉलेजों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय के फैसले से संस्थानों और छात्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। प्रवेश क्षमता घटने से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के अवसर सीमित हो सकते हैं। कॉलेजों ने लगाए गए जुर्मानों पर भी आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि संबंधित निर्णयों की समीक्षा की जानी चाहिए। हाईकोर्ट से विश्वविद्यालय के आदेशों पर राहत देने की मांग की गई है। मामले में दोनों पक्षों के तर्कों पर न्यायालय विचार करेगा। इस विवाद का असर आगामी प्रवेश प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े पक्ष इस मामले पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। अदालत के अंतिम फैसले के बाद आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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