पारकला प्रभाकर ने युवाओं से सामाजिक और लोकतांत्रिक असमानता के खिलाफ सक्रिय होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज में समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार, यदि एसआईआर के दौरान पात्र लोगों का नाम मतदाता सूची से बाहर रह जाता है तो वे दूसरे दर्जे के नागरिक जैसा महसूस कर सकते हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया। युवाओं से जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील की गई। उन्होंने निष्पक्ष और समावेशी व्यवस्था की आवश्यकता बताई। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सभी पात्र नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। उनके वक्तव्य ने मतदाता अधिकारों और समानता के मुद्दे पर चर्चा को बढ़ावा दिया। उन्होंने नागरिक अधिकारों की सुरक्षा को लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक बताया।

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