IIT मद्रास के पूर्व छात्र डॉ. कृष्ण चिवुकुला ने परोपकार की एक अनोखी मिसाल पेश की है। वह Indo-MIM Pvt Ltd के संस्थापक हैं, जिसकी कीमत करीब 4,200 करोड़ रुपये आंकी जाती है। वर्ष 2024 में उन्होंने अपनी कंपनी के 228 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर अपने संस्थान IIT मद्रास को दान किए थे। कंपनी के IPO के दौरान संस्थान ने अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचकर लगभग 112 करोड़ रुपये प्राप्त किए। इसे किसी भारतीय विश्वविद्यालय को IPO से जुड़ा सबसे बड़ा नकद वितरण माना जा रहा है। इस योगदान से IIT मद्रास के शोध, नवाचार और शैक्षणिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। डॉ. चिवुकुला ने अपनी सफलता का लाभ शिक्षा और अनुसंधान क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित किया है। यह पहल पूर्व छात्रों और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण बन गई है। Alumni philanthropy के जरिए उच्च शिक्षा संस्थानों को नई संभावनाएं मिल रही हैं। इस दान से IIT मद्रास की शोध क्षमता और नवाचार कार्यक्रमों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह घटना भारत में शिक्षा क्षेत्र में निजी योगदान के बढ़ते महत्व को दर्शाती है। Source: Source Post navigation ‘मुस्कुराता बस्तर’ थीम पर जगदलपुर में कार्टून कार्यशाला, विद्यार्थियों को मिलेंगे विशेषज्ञों से रचनात्मक गुर IIT खड़गपुर के प्रोफेसर सूर्य के. पाल को J.C. बोस ग्रांट, AI आधारित स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग पर करेंगे शोध