सदियों तक वैज्ञानिक यह नहीं समझ पाए कि फ्लेमिंगो जन्म से गुलाबी क्यों नहीं होते। 1960 के दशक में हुई एक महत्वपूर्ण खोज ने इस रहस्य से पर्दा उठाया। वैज्ञानिकों ने पाया कि फ्लेमिंगो का गुलाबी रंग उनके भोजन से मिलता है। वे शैवाल और ब्राइन श्रिम्प जैसे जीवों का सेवन करते हैं, जिनमें कैरोटिनॉयड नामक प्राकृतिक रंगद्रव्य मौजूद होता है। पक्षियों का शरीर इन रंगद्रव्यों को ऐसे यौगिकों में बदल देता है जो धीरे-धीरे उनके पंखों में जमा होने लगते हैं। जन्म के समय फ्लेमिंगो के बच्चे हल्के भूरे या सफेद रंग के होते हैं। जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, उनका रंग धीरे-धीरे गुलाबी होता जाता है। अलग-अलग प्रजातियों में भोजन के आधार पर गुलाबी रंग की गहराई भी अलग होती है। यह आकर्षक रंग केवल उनकी पहचान ही नहीं, बल्कि प्रजनन और जीवित रहने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वस्थ और अधिक गुलाबी फ्लेमिंगो साथी चुनने की प्रक्रिया में अधिक आकर्षक माने जाते हैं।

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