भारत में औपचारिक रिटेल क्रेडिट की पहुंच पिछले एक दशक में दोगुनी से अधिक हो गई है। इस वृद्धि में व्यक्तिगत ऋण जैसे उपभोग आधारित कर्ज की बड़ी भूमिका रही है। बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक अधिक लोगों की पहुंच बढ़ी है। युवा उधारकर्ताओं और महिलाओं के बीच भी क्रेडिट उपयोग में विस्तार देखा गया है। देश के कई हिस्सों में नए ग्राहकों ने औपचारिक ऋण व्यवस्था को अपनाया है। उत्तरी और मध्य राज्यों में क्रेडिट गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्रों में क्रेडिट वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी रही है। यह बदलाव दर्शाता है कि लोग अब ऋण का इस्तेमाल केवल संपत्ति खरीदने के लिए नहीं कर रहे हैं। उपभोक्ता खर्च और जीवनशैली से जुड़े जरूरतों के लिए भी कर्ज लिया जा रहा है। वित्तीय संस्थानों के विस्तार और डिजिटल सेवाओं ने क्रेडिट पहुंच आसान बनाई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रवृत्ति भारतीय उपभोक्ता बाजार में बदलाव को दर्शाती है। बढ़ती क्रेडिट पहुंच आर्थिक गतिविधियों में लोगों की भागीदारी को भी प्रभावित कर रही है।

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