विदेश मंत्रालय ने भारत के विदेशी फंडिंग कानून को लेकर अमेरिकी सांसद की आलोचना को खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने कहा कि विधायी मामलों पर निर्णय लेना भारतीय संसद का आंतरिक विषय है। अमेरिका समेत कई देश विदेशी वित्त पोषण को नियंत्रित करने के लिए अपने नियम लागू करते हैं। एक अमेरिकी सांसद ने भारत के विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इन बदलावों का असर भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ सकता है। भारत सरकार ने इस आलोचना को अनुचित बताते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हर देश को अपने कानून और नीतियां बनाने का अधिकार है। FCRA कानून विदेशी योगदान के नियमन से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रावधान है। प्रस्तावित बदलावों को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर चर्चा जारी है। भारत ने दोहराया कि उसके कानून देश के हितों और पारदर्शिता को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं।

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