एक मेटा कर्मचारी ने नौकरी की अनिश्चितता के कारण मातृत्व योजना को टालने की बात कही है। उसने बताया कि परिवार बढ़ाने का फैसला अब आर्थिक और रोजगार सुरक्षा से जुड़ गया है। आमतौर पर बच्चे का निर्णय वित्तीय स्थिति, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत लक्ष्यों पर निर्भर करता है। लेकिन इस मामले में नौकरी जाने की चिंता ने इस फैसले को प्रभावित किया है। कर्मचारी को डर है कि आने वाले समय में उसकी नौकरी सुरक्षित रहेगी या नहीं। उसने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि कहीं ऐसा न हो कि वह कभी मां न बन पाए। यह मामला तकनीकी क्षेत्र में रोजगार की अस्थिरता को भी उजागर करता है। बड़ी कंपनियों में छंटनी के माहौल ने कई कर्मचारियों की निजी योजनाओं पर असर डाला है। विशेषज्ञों के अनुसार आर्थिक स्थिरता परिवार नियोजन के फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह घटना आधुनिक कार्यस्थल में नौकरी सुरक्षा और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन की चुनौती को दिखाती है।

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