सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने सबरीमाला मामले में धार्मिक स्वतंत्रता, महिलाओं के अधिकार, और समुदायों के मौलिक अधिकारों पर गहन बहस की. पारसी, जैन और आदिवासी समुदायों ने अपना-अपना नजरिया सामने रखा. अदालत ने धार्मिक समुदायों के अधिकारों और उनके नियमों के प्रभावों पर सवाल उठाए.

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