भारतीय रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। रुपया 17 पैसे गिरकर 95.59 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। रुपये की कमजोरी पर भारतीय रिजर्व बैंक के FCNR स्वैप की डेडलाइन आगे बढ़ाने के फैसले का असर पड़ा। इससे बाजार की धारणा पर दबाव देखने को मिला। इससे पहले RBI की पहल से बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा जुटाई गई थी। विश्लेषकों के अनुसार, इससे रुपये को कुछ समय के लिए सहारा मिल सकता है। हालांकि, व्यापक स्तर पर रुपये में कमजोरी बने रहने की आशंका जताई गई है। विदेशी मुद्रा बाजार में निवेशकों की नजर आगे के घटनाक्रम पर बनी हुई है। घरेलू शेयर बाजारों में भी सोमवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। शेयर बाजार की कमजोरी ने भी रुपये की धारणा पर असर डाला। डॉलर के मुकाबले रुपये की आगे की दिशा कई घरेलू और वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी। बाजार में विदेशी पूंजी के प्रवाह और मुद्रा की मांग पर भी नजर रहेगी।

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