छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वेतन निर्धारण में विभागीय गलती से हुए अतिरिक्त भुगतान की पांच साल बाद वसूली को अवैध माना है। कोर्ट ने पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ जारी वसूली आदेश निरस्त कर दिए। साथ ही अब तक वसूल की गई राशि कर्मचारियों को लौटाने का निर्देश दिया है। मामले में पुलिस और राजस्व विभाग के सात कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा वेतन से की जा रही वसूली को चुनौती दी थी। उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट के जोगेश्वर साहू, थॉमस डेनियल बनाम स्टेट ऑफ केरल और स्टेट ऑफ पंजाब बनाम रफीक मसीह के फैसलों का हवाला दिया गया। दलील दी गई कि कर्मचारी की गलती के बिना विभागीय वेतन निर्धारण त्रुटि से हुआ अतिरिक्त भुगतान पांच साल से अधिक पुराना होने पर वसूल नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने इन न्याय दृष्टांतों के आधार पर वसूली आदेशों को रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी की गलती नहीं होने पर ऐसी वसूली उचित नहीं है। अदालत के आदेश से कंपनी कमांडर, इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर, एएसआई, एपीसी, हवलदार और पटवारी को राहत मिली है। विभागों को कर्मचारियों से पहले वसूली गई रकम वापस करने का निर्देश भी दिया गया है। फैसले से विभागीय वेतन निर्धारण की गलती के कारण अतिरिक्त भुगतान की वसूली झेल रहे तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। Source: Source Post navigation ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI की 636 पन्नों की चार्जशीट, दहेज हत्या और प्रताड़ना के आरोप मेट्रिमोनियल साइट ने 100 रिश्तों का किया था वादा, मिले सिर्फ 51; केरल आयोग ने 15 हजार रुपये रिफंड का दिया आदेश