ज़ेप्टो की कथित इंटर्नशिप भर्ती ने जेंडर भेदभाव और नौकरी की शर्तों को लेकर बहस छेड़ दी है। कथित विज्ञापन में 20,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड की पेशकश बताई गई है। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें केवल पुरुष छात्रों को आवेदन के लिए कहा गया था। उम्मीदवारों के लिए 20 किलोग्राम वजन उठाने की क्षमता भी जरूरी बताई गई। इसके अलावा, 10 से 12 घंटे तक खड़े रहने की शर्त का भी उल्लेख था। इन शर्तों ने कैंपस भर्ती में समान अवसर और निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे जेंडर आधारित भेदभाव से जोड़ा है। वहीं, कुछ लोगों का तर्क है कि शारीरिक श्रम वाली भूमिकाओं में ऐसी आवश्यकताएं काम की प्रकृति पर निर्भर कर सकती हैं। विवाद के बीच इस कथित भर्ती नोटिस की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि विज्ञापन वास्तविक है, तो भर्ती मानदंडों की पारदर्शिता और उनके औचित्य पर गंभीर चर्चा जरूरी हो जाती है। यह मामला इस व्यापक सवाल को सामने लाता है कि नौकरी की आवश्यकता कब उचित होती है और कब वह भेदभाव की सीमा पार कर सकती है।

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