रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जर्मनी ने अपनी रक्षा नीति में बड़े बदलाव शुरू किए हैं। बर्लिन ने सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भारी निवेश की योजना बनाई है। जर्मनी ने अपनी सेना की तैयारी में मौजूद कमियों को दूर करने पर जोर दिया है। इस बदलाव में अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जर्मनी का पहला F-35 लड़ाकू विमान टेक्सास में अंतिम असेंबली के करीब पहुंच गया है। यह जर्मन वायुसेना की क्षमताओं में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी का संकेत माना जा रहा है। F-35 को जर्मनी की नई रक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बनाया गया है। रूस के यूक्रेन पर आक्रमण ने बर्लिन को अपनी सैन्य तैयारियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। जर्मनी ने सैन्य आधुनिकीकरण के लिए 100 अरब यूरो के विशेष फंड समेत बड़े वित्तीय प्रावधान किए हैं। इन निवेशों का उद्देश्य हथियार प्रणालियों और सैन्य बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना है। F-35 की खरीद से जर्मनी की हवाई युद्ध क्षमता को मजबूत करने की उम्मीद है। यह बदलाव देश की लंबे समय से चली आ रही रक्षा नीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है।

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