नई कार खरीदते समय केवल उसकी चमक देखकर उसे बिल्कुल नई मान लेना सही नहीं है। डीलरशिप तक पहुंचने और लंबे समय तक स्टोरेज में रहने के दौरान कार को नुकसान हो सकता है। कई बार छोटे-मोटे नुकसान की मरम्मत डिलीवरी से पहले कर दी जाती है। ऐसी मरम्मत की जानकारी खरीदार को हमेशा स्पष्ट रूप से नहीं दी जाती। डीलरशिप में प्रदर्शित डेमो कारों को भी कभी-कभी नई कार के तौर पर बेचा जा सकता है। इसलिए कार की डिलीवरी लेने से पहले उसकी पूरी तरह जांच करना जरूरी है। बॉडी पर खरोंच, डेंट और पेंट में अंतर जैसे संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। टायर, ओडोमीटर और कार के अंदरूनी हिस्सों की भी जांच की जानी चाहिए। कार के दस्तावेजों और सर्विस रिकॉर्ड से भी उसकी स्थिति की पुष्टि की जा सकती है। किसी संभावित समस्या का पता लगाने के लिए थर्ड-पार्टी प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन कराना बेहतर विकल्प है। विशेषज्ञ जांच से ऐसी खामियां सामने आ सकती हैं जिन्हें सामान्य निरीक्षण में नजरअंदाज किया जा सकता है। कार का स्वामित्व लेने से पहले यह सावधानी भविष्य में होने वाली परेशानी से बचा सकती है। Source: Source Post navigation शीन का शेयर बाजार में डेब्यू, 27 अरब डॉलर वैल्यूएशन का लक्ष्य; चार साल में एक चौथाई रह गई कीमत गोदरेज से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में Orris के MD अमित गुप्ता मुंबई में गिरफ्तार