नागरिक उड्डयन मंत्रालय पायलटों के डोप टेस्ट को लेकर बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है। मौजूदा व्यवस्था में हर साल सीमित संख्या में पायलटों का परीक्षण किया जाता है। अब मंत्रालय सभी पायलटों का सालाना डोप टेस्ट कराने के विकल्प पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव लागू होने पर जांच का दायरा 10 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा। इसका उद्देश्य पायलटों की सुरक्षा और फिटनेस सुनिश्चित करना है। विमानन क्षेत्र में नशे के सेवन को लेकर सुरक्षा मानकों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। सभी पायलटों की नियमित जांच से नियमों के पालन की निगरानी बेहतर हो सकती है। प्रस्तावित व्यवस्था में हर पायलट का साल में कम से कम एक बार परीक्षण किया जा सकता है। इससे नशे के प्रभाव में उड़ान संचालन की संभावित जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस बदलाव को लागू करने के लिए प्रशासनिक और संसाधन संबंधी तैयारियों की जरूरत होगी। मंत्रालय की ओर से प्रस्ताव पर विचार किए जाने के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी। यह कदम विमानन सुरक्षा से जुड़े नियमों को और सख्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है। Source: Source Post navigation उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन की बड़ी उपलब्धि, 1.5 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहुंचा नल का पानी दिल्ली-पंजाब और उत्तर भारत जाने वाली ट्रेनों के रूट में बदलाव, यात्रियों के लिए जारी हुई नई सूची