सोनीपत में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर कृषि विभाग ने कड़ी सख्ती बरतने का संकेत दिया है। विभाग के अधीनस्थ अधिकारी संजीव घनगस ने बताया कि इस साल से प्रतिबंध लागू कर, उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना व कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है, पराली जलाने से न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि जमीन की उर्वरता घटती है, जिससे भविष्य की फसल पैदावार प्रभावित होती है। विभाग ने किसानों को वैकल्पिक उपाय जैसे किसान मित्र योजना के तहत उर्वरक, जैविक खाद और न्यूनतम जुताई जैसी तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसके साथ ही, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए मिट्टी में कार्बन स्टॉक बढ़ाने हेतु कुसुम्बा, धान के पन्ने और पिचाई जैसी हरित अन्नभट्टी तकनीकों को अपनाने की भी सलाह दी गई। किसानों से अपील है कि वे इस दिशा में कदम बढ़ाएँ, न केवल पर्यावरण की रक्षा करें, बल्कि अपनी फ़सल की उपज और आय में सुधार लाएँ।

By AIAdmin