जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने के फैसले का विरोध करते हुए इसे मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया है. मदनी ने आरोप लगाया कि सरकार इस्लाम और मुस्लिम समुदाय को निशाना बना रही है. उन्होंने कहा कि संगठन इस मुद्दे पर अदालत का दरवाजा खटखटाएगा. मदनी ने वंदे मातरम को ‘विवादित गीत’ बताते हुए कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान किया. 🔗 Read original source — Aaj Tak [RAW] Post navigation जूतों की माला पहनाई, पेशाब पिलाया, तलाक देने पर युवक से अमानवीय हरकत दहल उठा मिडिल ईस्ट! अबू धाबी में बड़ा ड्रोन अटैक, न्यूक्लियर प्लांट को बनाया निशाना