सीबीएसई ने 1 जुलाई से नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का नियम अनिवार्य कर दिया है, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं। इस फैसले से छात्र, अभिभावक और स्कूल प्रिंसिपल्स में भारी असंतोष और चिंता व्याप्त है क्योंकि नया नियम अकादमिक सत्र के बीच में लागू किया गया है. कई छात्र पहले से चुनी गई विदेशी भाषाएं छोड़ने को मजबूर हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है. शिक्षाविद और अभिभावक इस निर्णय की समयबद्धता और प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहे हैं, साथ ही बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जता रहे हैं. 🔗 Read original source — Aaj Tak [RAW] Post navigation 'यहां जिंदगी नर्क है, मुझे घर ले चलो', मौत से पहले ट्विशा ने मां को भेजा था मैसेज डीजल-पेट्रोल बचत की अपील, दिल्ली में आज से एक्स्ट्रा मेट्रो