कूटनीति’ में आज बात उस रणनीतिक पुल की, जो दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को यूरोप के सबसे आधुनिक और इनोवेटिव देशों से जोड़ रहा है. ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ अब कूटनीति का कोई छोटा-मोटा आयोजन नहीं रहा. सप्लाई-चेन के झटके, क्लाइमेट प्रेशर और तकनीकी मुकाबले के इस दौर में भारत और नॉर्डिक देशों को समझ आ गया है कि उन्हें एक-दूसरे की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस तीसरे शिखर सम्मेलन के लिए ओस्लो पहुँच चुके हैं.

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