मुंबई के दिंडोशी सेशन कोर्ट ने एक बड़े विवादास्पद POCSO (बाल शोषण एवं यौन शोषण) केस में 12 साल पहले गिरफ़्तार हुए आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बाइजाजत बरी कर दिया। आरोपी, जो लंबे समय से जेल की सलाखों के पीछे रहा था, ने अपील में कहा कि उसके खिलाफ प्रमाण पर्याप्त नहीं हैं और कई प्रमुख गवाहों के बयान बदल गए हैं। कोर्ट ने सबूतों की पुनः जाँच की और पाया कि अभियोजन पक्ष ने मौखिक गवाही पर अधिक भरोसा किया था, जबकि दस्तावेजी प्रमाणों की कमी थी। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि न्याय प्रणाली को संदेह की प्रधानता को याद रखना चाहिए, ताकि निराधार आरोपों से निर्दोष को जेल न भेजा जाए। बारीकी से देखे तो इस फैसले से समान केसों में संदेह के सिद्धांत की पुनः पुष्टि हुई है, जो भविष्य में बाल यौन शोषण के मामलों में न्याय प्रक्रिया को प्रभावी बना सकता है। Post navigation पटना में 10 साल की छात्रा की नायाब हत्या, पड़ोसी ने हथौड़े से मार डाला, आरोपी पकड़ा गया दुर्ग में बुजुर्ग ने पुरानी रंजिश के बदले आधे उम्र के गुंडे पर टंगिया से किया घातक प्रहार