वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, रूस–यूक्रेन युद्ध और होर्मुज संकट जैसे अंतरराष्ट्रीय तनावों के बावजूद भारत ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को अपेक्षाकृत नियंत्रित रखा. केंद्र सरकार ने पिछले चार वर्षों में कई बार एक्साइज ड्यूटी घटाकर उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की. वहीं राज्यों के अलग-अलग वैट के कारण देशभर में ईंधन कीमतों में अंतर बना रहा. 🔗 Read original source — Aaj Tak [RAW] Post navigation चित्तौड़गढ़ में चरम पर गर्मी, लू का रेड जोन बना पश्चिमी राजस्थान ओमान से डील के फायदे… 99% चीजों पर '0' टैरिफ, होर्मुज के एक हिस्से पर दबदबा