गुरुवार को, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट पर दोबारा मतदान कराया जा रहा है. चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को हुए मतदान को कथित चुनावी धांधली के कारण रद्द कर रिपोलिंग का आदेश दिया. इस सीट पर बीजेपी, टीएमसी, सीपीआई और कांग्रेस समेत कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं. हालांकि टीएमसी उम्मीदवार जहाँगीर खान ने रिपोलिंग से पहले चुनावी मुकाबले से पीछे हटने की घोषणा की, लेकिन नामांकन वापसी की समयसीमा खत्म होने के कारण उनका नाम अब भी चुनावी मैदान में बना हुआ है. इस सीट पर दोबारा मतदान ने बंगाल की राजनीति में नया सियासी मोड़ ला दिया है.

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट में एक और युद्ध हो रहा है. चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल की मतदान को कथित चुनावी धांधली के कारण रिपोलिंग का आदेश दिया. इस सीट पर बीजेपी, टीएमसी, सीपीआई और कांग्रेस समेत कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं. इन विभिन्न पक्षों के दल पर बड़ी दबाव है, जिनमें से कई ने रिपोलिंग से पहले चुनावी मुकाबले से पीछे हटने की घोषणा की. हालांकि, नामांकन वापसी की समयसीमा खत्म होने के कारण टीएमसी उम्मीदवार जहाँगीर खान अभी भी चुनावी मैदान में बना हुआ है.

इस दोबारा मतदान के प्रभाव संभवतः विक्षेपित रहेंगे. चुनाव की घटनाओं के बाद चुनाव आयोग ने मैदान में उपस्थित सरकार और कांग्रेस पक्ष की 35 कंपनी का बैटल जुमारी से खुशी दिखाई दे रहा है. चुनाव आयोग ने भी केंद्रीय सुरक्षाबलों की मदद से इस मतदान पर सुरक्षा दी है. यह चुनाव दिवालिया में बंगाल की राजनीति और सामाजिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है.

यह दोबारा मतदान इसके पहले की तुलना में बंगाल की राजनीति में अधिक संघर्षी और प्रतिस्पर्धी हो गया है. इस चुनाव के परिणाम बंगाल की राजनीति में समझौतों, सामूहिक दलों और मददकर्ताओं का नए मोड़ ला दे रहे हैं. चुनाव आयोग की घोषणा और सुरक्षा केंद्रीय सरकार की बैटल जुमारी ने फलता में चुनावी आंदोलन को अधिक दबाव पहुँचाया है.

इस दोबारा मतदान से बंगाल की राजनीति का नया आकार फैलाए गए है. टीएमसी, बीजेपी, सीपीआई और कांग्रेस पक्षों में विभिन्न दल के लड़ाइयों का घटनाक्रम चुनाव आयोग ने बताया है. इसके परिणाम स्वरूप यह देखने में लगेगा कि जब रिपोलिंग शुरू होंगे, फलता में नए पक्षों की अवधारणा कितनी दक्ष होगी.

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