सोनीपत के मोतीलाल नेहरू खेलकूद विद्यालय (MNSS) में एक अनोखा बहस मंच तैयार किया, जहाँ ‘किताबें बेहतर’ बनाम ‘इंटरनेट श्रेष्ठ’ के मुद्दे पर छात्रों ने तीखा तर्क दिया। दसवीं कक्षा के अनिरुद्ध ने कहा, “पुस्तकों में गहरी समझ और स्थाई ज्ञान मिलता है, जबकि इंटरनेट में अफवाहें और सतही जानकारी भरपूर है।” वहीं नवोदित डिजिटल उत्साही तृप्ति ने बताया, “इंटरनेट तुरंत अपडेटेड डेटा, मल्टीमीडिया सीखने के साधन और विश्वभ्रमण जैसा अनुभव देता है, जो किताबों में नहीं मिलती।” दोनों पक्षों ने आँकड़े, शोधपत्र और वास्तविक जीवन के उदाहरणों से अपने दावे मजबूत किए। दर्शकों में मौजूद अभिभावक और शिक्षकों को भी इस तीव्र तालमेल ने दंग कर दिया, कई ने अपनी पुरानी धारणाओं को पुनः विचारने पर मजबूर महसूस किया। अंत में, स्कूल प्राचार्य ने निष्कर्ष निकाला कि “किताबें और इंटरनेट, दोनों मिलकर ही छात्रों को संपूर्ण और संतुलित शिक्षा दे सकते हैं”। यह चर्चा न केवल छात्रों की आलोचनात्मक सोच को उजागर करती है, बल्कि भविष्य के शिक्षण के नए मिश्रण की ओर संकेत भी करती है। Post navigation गुजरात निकाय चुनाव: सीएम भूपेंद्र पटेल व अमित शाह ने परिवार संग किया मतदान तारापुर में सीएम सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान: फाइल दबाकर बैठे अफसरों को मिली कड़ी जवाबी कार्रवाई