शहडोल (शाहडोल) जिले के धनपुरी गाँव के रहने वाले अजय अरविंद नामदेव ने अपने शौक में साधारण स्कूटी से लेकर सरकारी एंबुलेंस तक चुराते हुए एक अनोखा ‘फ्री टैक्सी’ मॉडल तैयार किया। लोगों को यह नहीं पता था कि ये एंबुलेंस असली मेडिकल सेवा नहीं, बल्कि उनका निजी परिवहन माध्यम बन चुका था। पुलिस के अनुसार, नामदेव ने 2022-2024 के बीच 12 स्कूटी और दो सरकारी एंबुलेंस चुराए। वह इन वाहनों को गांव के विभिन्न इलाकों में मुफ्त में चलाता, यात्रियों से छोटी‑छोटी सेवा शुल्क लेता और इस प्रकार अपनी ‘सड़क पर मुफ्त टैकसी’ सेवा को व्यावसायिक बना रहा। जब स्थानीय लोग एंबुलेंस के बिना सेवा नहीं मिलने की शिकायत करने लगे, तो पुलिस ने गश्त बढ़ा दी और अंततः नामदेव को पकड़ लिया। उसकी गिरफ्तारी के बाद पता चला कि उसने हर एंबुलेंस को एक निजी बुकिंग बुक के रूप में रख दिया था और उसके पास सूचनात्मक रजिस्टर भी था। अब वह चोरी के आरोप में जेल की सजा का सामना करेगा, जबकि इस मामले ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों को एंबुलेंस सुरक्षा पर पुनः विचार करने के लिए मजबूर कर दिया। Post navigation सरकारी GST ठगी को ध्वस्त किया: 12 करोड़ का केस आगे सबसे पुराने धावक की उम्र कितनी है? लंदन मैराथन क्विज़