राजस्थान की राजनैतिक धरती पर मारवाड़ की रेत में अब सिर्फ धूप नहीं, बल्कि तेज़ पॉलिटिकल ब्रीज चल रहा है। डोटासरा‑जुली गठबंधन के टूटने के बाद, विपक्षी नेता पायलट ने अपनी एंट्री दर्ज कराई, जिससे प्रदेश की सत्ता समीकरण में हलचल मची है। गहलोत परिवार, जो दिल्ली में लगातार सक्रिय रह कर हर हलचल पर नज़र रखता है, अब इस नई चाल को अपने हिट‑एंड‑रन स्ट्रैटेजी में शामिल कर रहा है। पायलट की लहर को रोकने के लिए गहलोत ने स्थानीय गठजोड़ को सुदृढ़ करने, किसानों के मुद्दों को प्रमुखता देने और युवा समूहों को आकर्षित करने के कई कदम उठाए। वहीं, विपक्षी बल भी अपने प्रादेशिक आधार को मजबूत करने के लिये सामाजिक अभियानों और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है। यह खेल अब सिर्फ एक-कदम आगे-पीछे नहीं, बल्कि मारवाड़ के भविष्य को तय करने वाला है, जहाँ हर फेहरिस्त में सत्ता की बौछारें बिखरी हुई हैं। Post navigation NIT कुरुक्षेत्र में आत्महत्याओं की लहर: निदेशक हटाए गए, संयुक्त रजिस्टार पर निलंबन इज़राइल की ‘स्थायी युद्ध’ रणनीति: क्या समय के विरुद्ध दौड़ है?