उत्तराखंड में 1700 से अधिक गांवों में रहने वाले लोग नहीं हैं, जिसे ‘भूतिया गांव’ संकट कहा जा रहा है। जीविका की कमी, जलवायु परिवर्तन और फीकी पड़ती परंपराएं लोगों को पलायन के लिए मजबूर कर रही हैं, जिससे बुजुर्ग निवासी और सुनसान खेतों को छोड़ दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण जीवन को पुनर्जीवित करने और गांवों को फिर से आकांक्षी बनाने के लिए बुनियादी ढांचे से परे रचनात्मक समाधानों की आवश्यकता है। यह संकट न केवल उत्तराखंड के लिए बल्कि पूरे देश के लिए चुनौती है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को मिलकर इस समस्या का समाधान करना होगा। उत्तराखंड के गांवों में सुंदरता तो है लेकिन यह अकेले परिवार का पेट नहीं पाल सकती। गांवों को बचाने के लिए हमें जल्द ही कदम उठाने होंगे। यह समस्या उत्तराखंड की नहीं, बल्कि पूरे देश की समस्या है। हमें मिलकर इसका समाधान करना होगा। गांवों को बचाने के लिए हमें नए और रचनात्मक तरीके अपनाने होंगे : Source Post navigation मुंबई की सड़कों पर मिला एक अनजान भिखारी निकला नांदेड़ का मेडिकल स्टूडेंट बहू ने सास को पीठ पर ढोकर बैंक पहुंचाया