भास्कर न्यूज | नारायणपुर कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जिले के विभिन्न ब्लाकों और दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में 5 से 20 मई तक विकसित कृषि संकल्प अभियान का व्यापक आयोजन किया गया। इस अभियान के तहत जिले के बावड़ी, करलाखा, कोडोली, कोखमेड़ा, बेनूर, इराकभट्टी, देवगांव, रेमावंड, कंदाड़ी, कुदला, महिमागवाड़ी, झारावाही, धनोरा, नेदनार, ब्रेहबेड़ा, नेलांगुर, पदमकोट, कुरुसनार, बासिंग, कच्चापाल, अकाबेड़ा, बोरान्ड, बोरपाल, पालकी, कस्तूरमेटा और गढ़बेंगाल सहित कुल 48 गांवों में विशेष शिविर एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अभियान के दौरान आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर कृषक-वैज्ञानिक चर्चा आयोजित की गई, जिसमें कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिया। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. हरेंद्र तोंडेय ने मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह दी और जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। पौधों को कीटों और रोगों से सुरक्षित रखने के लिए कीट वैज्ञानिक डॉ. आलिया अफरोज ने स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले प्राकृतिक कीटनाशकों जैसे नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और आग्नेयास्त्र की निर्माण विधि और उपयोग के बारे में बताया, जिससे किसान बिना महंगे रसायनों के प्रभावी तरीके से कीट नियंत्रण कर सकें। वहीं, उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. ललित कुमार वर्मा ने किसानों को फल, सब्जी और औषधीय फसलों की वैज्ञानिक खेती, उन्नत किस्मों के चयन और मूल्य संवर्धन के जरिए आय बढ़ाने के गुर सिखाए। वैज्ञानिकों के साथ-साथ इस अभियान में विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारियों ने भी उपस्थित होकर शासन की महत्वाकांक्षी कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। कृषि विभाग द्वारा डिजिटल एग्रीकल्चर के तहत एग्रीस्टैक, पीएम किसान सम्मान निधि योजना और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला गया, साथ ही किसानों को मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही अनुशंसित मात्रा में खाद उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए नियमित टीकाकरण, प्रमुख बीमारियों के लक्षण और उनके उचित उपचार के संबंध में पशुपालकों को जागरूक किया। इसके साथ ही, मत्स्य पालन विभाग द्वारा मछली पालन से जुड़ी विभिन्न शासकीय अनुदान योजनाओं, आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों और तालाब प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गई, ताकि किसान अपनी आय के स्रोतों में विविधता ला सकें। इस पूरे 15 दिवसीय अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को नई कृषि पद्धतियों, उन्नत कृषि तकनीकों, मृदा प्रबंधन, फसल विविधीकरण और उत्पादन लागत को कम करने के उपाय बताए। : Source Post navigation कवर्धा : सड़क किनारे कब्जे से राहगीर परेशान सुकमा : कला जत्था के जरिए गांव-गांव में पहुंच रही योजनाओं की जानकारी