दिल्ली विश्वविद्यालय ने खाली सीटों को भरने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की है। विश्वविद्यालय ने दो महिला कॉलेजों में 12वीं बोर्ड के अंकों के आधार पर ऑफलाइन दाखिले की अनुमति दी है। इस फैसले के बाद CUET आधारित प्रवेश प्रणाली को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कई लोग इस कदम को खाली सीटों की समस्या से निपटने का उपाय मान रहे हैं। वहीं, कुछ विशेषज्ञों ने प्रवेश प्रक्रिया में समानता और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। ऑफ-कैंपस कॉलेजों में सीटें भरने की चुनौती भी चर्चा का विषय बनी हुई है। इस फैसले से भविष्य में हाइब्रिड एडमिशन मॉडल की संभावना पर विचार शुरू हो गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रवेश नीति को लेकर छात्रों और शिक्षाविदों में अलग-अलग राय सामने आ रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन का उद्देश्य खाली सीटों को भरना और अधिक छात्रों को अवसर देना है। CUET व्यवस्था के बीच यह बदलाव उच्च शिक्षा प्रवेश प्रक्रिया में नए विकल्पों की ओर संकेत कर सकता है। Source: Source Post navigation सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद जयपुर कोचिंग संस्थानों का सर्वे, JDA करेगा गोपालपुरा बाईपास की जांच