केंद्र सरकार ने गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर निगरानी बढ़ा दी है। विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के नियमों को पहले से अधिक सख्त किया गया है। सरकार की इस नई व्यवस्था को कई लोग FCRA 2.0 के नाम से संबोधित कर रहे हैं। इसका उद्देश्य विदेशी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए नियमों में कई बदलाव किए हैं। नए प्रावधानों के तहत NGOs की गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन की जांच पर जोर दिया गया है। सरकार का कहना है कि नियमों का उद्देश्य गलत इस्तेमाल को रोकना है। वहीं, कुछ संगठनों ने इन सख्त नियमों को लेकर चिंता भी जताई है। विदेशी फंडिंग से जुड़े मामलों में अब निगरानी और अनुपालन की प्रक्रिया अधिक कड़ी हो गई है। FCRA के तहत पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया को भी अधिक नियंत्रित किया गया है। इस बदलाव से देश में काम करने वाले विदेशी सहायता प्राप्त संगठनों पर असर पड़ने की संभावना है।

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