भारतीय सप्लाई चेन में व्हे प्रोटीन की कीमतों में इस साल लगभग 90 % की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वजन घटाने की नई दवाओं, विशेषकर GLP‑1 वर्ग की दवाओं के व्यापक उपयोग के साथ, कई फिटनेस‑उत्साही और एथलीट मसल लॉस से बचने के लिए प्रोटीन सप्लाई पर निर्भर हो रहे हैं।

ऑनलाइन और ऑफ‑लाइन रिटेलर्स दोनों ने बताया कि दवाओं के कारण प्रोटीन की मांग में अचानक तेज़ी आई, जिससे मौजूदा स्टॉक की कमी और उत्पादन लागत में वृद्धि हुई। उत्पादन सुविधाओं में कच्चे माल के मूल्य, विशेषकर क्रीम और दूध प्रोटीन की कीमतें भी बढ़ी हैं, जिससे अंतिम उपभोक्ता मूल्य पर असर पड़ा।

उद्योग के प्रमुख खिलाड़ियों ने विकल्पों की खोज शुरू कर दी है। कुछ कंपनियां साइट्रिक फलों या अन्य पौध-आधारित प्रोटीन स्रोतों की ओर रुख कर रही हैं, जबकि अन्य मूल्य स्थिरता के लिए बड़े पैमाने पर आयात को बढ़ा रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि GLP‑1 दवाओं का प्रयोग जारी रहता है और फिटनेस सेक्टर में पोटीन की मांग बनी रहती है, तो कीमतों में अस्थायी रूप से और उछाल देखी जा सकती है। उपभोक्ताओं को बजट बनाते समय वैकल्पिक प्रोटीन स्रोतों पर विचार करने की सलाह दी गई है।