भारत सरकार Meta के बाद अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ भी बातचीत करने की योजना बना रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इन प्लेटफॉर्म की कानूनी स्थिति की समीक्षा करेगी। जांच का मुख्य मुद्दा यह होगा कि क्या ये प्लेटफॉर्म भारतीय कानून के तहत इंटरमीडियरी की परिभाषा में आते हैं। सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका और उनकी कानूनी जिम्मेदारियों को समझने की कोशिश कर रही है। इसके लिए संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों से बातचीत की जा सकती है। इंटरमीडियरी के तौर पर वर्गीकरण होने पर प्लेटफॉर्म पर कुछ कानूनी दायित्व लागू हो सकते हैं। सरकार इस संबंध में मौजूदा कानूनों और नियमों के तहत स्थिति स्पष्ट करना चाहती है। Meta के मामले के बाद अन्य प्लेटफॉर्म भी इस समीक्षा के दायरे में आ सकते हैं। सरकार की यह पहल डिजिटल क्षेत्र में नियामकीय अनुपालन पर केंद्रित है। इससे प्लेटफॉर्म कंपनियों की भारत में कानूनी जिम्मेदारियों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। संबंधित प्लेटफॉर्म की सेवाओं और संचालन के तरीके को भी जांच में ध्यान में रखा जा सकता है। सरकार और डिजिटल कंपनियों के बीच इस मुद्दे पर आगे बातचीत होने की संभावना है। फिलहाल सरकार की ओर से सभी प्लेटफॉर्म के नाम और जांच की विस्तृत प्रक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है। इस समीक्षा के परिणाम के आधार पर आगे की नियामकीय कार्रवाई तय हो सकती है। Source: Source Post navigation पेट्रोल-डीजल को चुनौती, भारत में अल्टरनेटिव फ्यूल कारों की बढ़ी रिकॉर्ड मांग अगस्त में नई कार खरीदने का मौका, 2.45 लाख रुपये तक के बेनिफिट्स और बड़े डिस्काउंट ऑफर