नासिक में उपस्थित हुए TCS केस में, आरोपी निदा खान फिर से कोर्ट में पेश हुई. डिजिटल फोरेंसिक जांच द्वारा प्रमाणित था कि उसने 171 इस्लामिक लिंक को पीड़िता को भेजे थे. कोर्ट ने उसकी दावों को न्यायिक हिरासत में स्वीकार किया. प्रवचन, अधिकृत सुद्धा और जिम्मेदारी लेने वाले पक्षों की शक्ति की भी बात आई है. इस मामले में कोर्ट ने डिजिटल सबूतों का उपयोग करके उन पुनरावृत्ति और दावों की नवागमी रेखाओं को समझाया. कोर्ट ने भी कहा है कि डिजिटल फोरेंसिक जांच विश्वासपटन और न्यायविरोधी नहीं है. प्रतिभागी दावा के साथ अधिकृत सुद्धा तक प्रवेश में आरोपियों की रोजगारी नहीं है, बल्कि वे कानून की पालन और जिम्मेदारता को समर्थक हैं. इस मामले में आरोपियों को भी कुछ अवश्य निपटन की चेतावनि दी गई। यह रैक्ट से जुड़ा हुआ मामला और इसकी घटनाओं के परिणाम स्वरूप, कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

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