दाइमी पासवर्ड की जगह अब पासकी को अपनाने की बात यूके के नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर (NCSC) ने जोरदार आवाज़ में की है। पासकी एक नई प्रमाणीकरण तकनीक है जो फिंगरप्रिंट, फेस आईडी या डिवाइस‑आधारित क्रिप्टोग्राफिक की का उपयोग करके लॉगिन को सुरक्षित बनाती है, जिससे पासवर्ड चोरी, ब्रीच या फ़िशिंग का जोखिम घटता है। उपयोगकर्ता को अब जटिल अक्षरों की श्रृंखला याद रखने की जरूरत नहीं, बल्कि एक सुरक्षित डिवाइस या बायो‑मेट्रिक से लॉगिन किया जा सकता है। NCSC ने बताया कि पासकी फिशिंग के लिये अर्डर‑इन-स्टेप को चीर नहीं सकती और यह एन्ड‑टू‑एन्ड एन्क्रिप्शन पर काम करती है। इस बदलाव से न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि कंपनियों को भी साइबर हमलों से बचाने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पासकी जल्द ही वैश्विक स्तर पर पासवर्ड को पूरी तरह से बदल देगा। Post navigation अयोध्या में 4 मई को र्म्लला आरती का लाइव दर्शन: दिव्य श्रृंगार की अनुपम झलक राजस्थान रॉयल्स‑सनराइजर्स हैदराबाद मुकाबले से पहले जयपुर में टिकट विवाद से हुआ हंगामा