वैज्ञानिक अंटार्कटिका के थ्वाइट्स ग्लेशियर को बचाने के लिए एक अनोखे उपाय पर काम कर रहे हैं। गर्म समुद्री जल के कारण यह विशाल ग्लेशियर नीचे से तेजी से पिघल रहा है। शोधकर्ताओं ने गर्म धाराओं को रोकने के लिए 80 किलोमीटर लंबे अंडरवाटर पर्दे के निर्माण का विचार रखा है। इस कृत्रिम अवरोध का उद्देश्य गर्म पानी को ग्लेशियर तक पहुंचने से रोकना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे ग्लेशियर के पिघलने की गति को कम किया जा सकता है। हाल ही में अमुंडसेन सागर में एक अभियान चलाकर जरूरी आंकड़े जुटाए गए हैं। इन आंकड़ों की मदद से इस परियोजना की व्यवहारिकता का आकलन किया जा रहा है। स्वालबार्ड क्षेत्र में भी पर्यावरणीय प्रभावों को समझने के लिए अध्ययन किए जा रहे हैं। विशेषज्ञ इस योजना के संभावित फायदे और जोखिमों का विश्लेषण कर रहे हैं। थ्वाइट्स ग्लेशियर को वैश्विक समुद्र स्तर बढ़ने के खतरे से जोड़कर देखा जाता है। वैज्ञानिकों का लक्ष्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए नए समाधान तलाशना है। Source: Source Post navigation जापान में पहली बार 40°C पार तापमान पर ‘ब्रूटली हॉट डे’ घोषित, बढ़ती गर्मी ने बढ़ाई चिंता हेलसिंकी की प्यास बुझाने वाली 120 किमी लंबी भूमिगत सुरंग, 9 दिनों में पहुंचता है साफ पानी