उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। समाजवादी पार्टी (सपा) से निष्कासित विधायक पूजा पाल को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। पूजा पाल पिछले काफी समय से अपनी ही पार्टी सपा के रुख से अलग हटकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली और अतीक अहमद के खिलाफ उनकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की खुलकर तारीफ कर रही थीं। इसी क्रम में उन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी लाइन के विपरीत जाकर क्रॉस-वोटिंग भी की थी, जिसके बाद सपा ने अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया था। अब बीजेपी में उनकी सक्रिय भूमिका को पार्टी की ओबीसी (पाल समाज) पैठ बढ़ाने और अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट के रूप में देखा जा रहा है।

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