वाशिंगटन और तेहरान ने पाकिस्तान में द्वितीय दौर की वार्ताएं नहीं कर पाई, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें दो प्रतिशत से अधिक बढ़ गईं। वार्ता के निरंतर न होने से मध्य-पूर्व की तनावपूर्ण स्थिति में फिर से संकोच बढ़ा, जिससे वैश्विक तेल बाजार में खरीदारी की उँची मांग हुई। निवेशकों ने इस uncertainty को ध्यान में रखते हुए तेल के अनुबंधों की कीमतें ऊपर ले लीं। अब तक की तेज़ी से कीमतों में 2% से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई, जो मौजूदा भू-राजनीतिक जोखिमों को दर्शाती है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि शांति वार्ता फिर से टाल दी गई तो तेल की कीमतें और भी ऊपर जा सकती हैं। Post navigation संजय दत्त की हरियाणा यात्रा: ‘मैं भी हरियाणा का हूँ’ कहते हुए अरियन खान से हुई मुलाकात ने मचाई दंग 27 अप्रैल का इतिहास: बाबर की दिल्ली जीत, जोहरा सहगल का जन्म और अन्य प्रमुख घटनाएँ