अमेरिका के सैक्रामेंटो में कार्यरत करनाल के युवक सुपनदीप सिंह का शव 11 दिन के लंबे इंतजार के बाद रविवार को उसके पैतृक गांव पहुंचा। 16 जून को काम से लौटने के बाद हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से उसकी असामयिक मृत्यु हो गई थी। सुपनदीप परिवार का इकलौता बेटा था और अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए दो साल पहले डंकी रूट से अमेरिका गया था। शव को भारत लाने की प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण और खर्चीली रही, जिसमें करीब 20 से 25 लाख रुपये का खर्च आया। अंततः सरकारी प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से शव को स्वदेश लाया जा सका। गांव में जैसे ही शव पहुंचा, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। चाचा ने सुपनदीप को मुख्याग्नि दी। Source: Source Post navigation 146 साल में सबसे सूखा जून: मानसून की सुस्ती से देशभर में बारिश की भारी कमी अमृतसर: मजीठा में अघोषित बिजली कटौती से ग्रामीणों में भारी आक्रोश, बिजली घर का किया घेराव