सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा को लेकर केंद्र सरकार की रिपोर्ट को अपर्याप्त बताते हुए कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने कहा कि रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण पहलू अस्पष्ट हैं, जिससे पर्यावरणीय सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना हुआ है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञों की एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति पूरे मामले की स्वतंत्र, वैज्ञानिक और तथ्यात्मक जांच करेगी। समिति का काम अरावली क्षेत्र में अवैध खनन, निर्माण और हरित क्षेत्र के उल्लंघन की जांच करना भी होगा। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जांच में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाए। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को समिति का सहयोग करने का आदेश दिया गया है। यह कदम अरावली के संरक्षण के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। जल्द ही समिति अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी। पर्यावरणविदों ने इस फैसले का स्वागत किया है। Source: Source Post navigation दिल्ली के अर्बन विलेज में क्यों बार-बार लगती है आग? मालवीय नगर हादसे ने दिखाई अनदेखी की त्रासदी जैसलमेर का सोनार किला तीन दिन तक रेत के तूफान की चपेट में, रामगढ़ में भारी बारिश और बिजली संकट