अल-नीनो को अक्सर कमजोर मॉनसून और सूखे से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन कई बार इसकी भविष्यवाणियां गलत साबित हुई हैं. इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिले हैं, जब मजबूत अल-नीनो के बावजूद भारत में सामान्य या औसत से ज्यादा बारिश हुई. वैज्ञानिकों के मुताबिक, हिंद महासागर की स्थिति, हवाओं का पैटर्न और ग्लोबल वार्मिंग जैसे कई फैक्टर्स मॉनसून को प्रभावित करते हैं. यही वजह है कि अब मौसम विभाग मल्टी-फैक्टर मॉडल के जरिए पूर्वानुमान तैयार करता है. 🔗 Read original source — Aaj Tak [RAW] Post navigation ट्विशा ने जिमनास्टिक बेल्ट से लगाई थी फांसी! क्या कहती है पोस्टमार्टम रिपोर्ट हेयर ट्रांसप्लांट के बाद गलती से खिंच जाएं बाल तो क्या दोबारा उगेंगे?