आइसलैंड ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का अनोखा उपयोग किया है। देश में लगभग हर घर को गर्म रखने के लिए ज्वालामुखीय भू-तापीय ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है। यहां की बिजली का लगभग पूरा उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से होता है। भू-तापीय और जलविद्युत ऊर्जा आइसलैंड की ऊर्जा व्यवस्था की मुख्य आधार हैं। इस मॉडल ने देश को दुनिया की सबसे स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों में शामिल किया है। ज्वालामुखीय गतिविधियों से मिलने वाली गर्मी का उपयोग लंबे समय से घरेलू और औद्योगिक जरूरतों के लिए किया जा रहा है। इससे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता काफी कम हुई है। आइसलैंड का ऊर्जा मॉडल जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों के लिए एक उदाहरण माना जाता है। स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने में मदद मिली है। विशेषज्ञ अन्य देशों के लिए भी इस प्रणाली को प्रेरणादायक मानते हैं। आइसलैंड ने दिखाया है कि प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था विकसित की जा सकती है। Source: Source Post navigation इस्लामाबाद और रावलपिंडी में आटे का संकट गहराया, गेहूं आपूर्ति रुकने से बढ़ी कालाबाजारी अमेरिकी हमलों के बीच ईरान के बच्चों के कैंसर अस्पताल से कीमोथेरेपी करा रहे 211 मरीजों को सुरक्षित निकाला गया