मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी नोटरी को विवाह प्रमाणित करने या विवाह अधिकारी के रूप में कार्य करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने फर्जी विवाह दस्तावेज़ तैयार करने के मामले में एक नोटरी का लाइसेंस निलंबित कर दिया। यह मामला एक युवती की शिकायत के बाद सामने आया, जिसने जबरन कथित कोर्ट मैरिज कराए जाने का आरोप लगाया था। सुनवाई के दौरान युवती ने अपने माता-पिता के पास लौटने और आगे की पढ़ाई जारी रखने की इच्छा जताई। अदालत ने उसके बयान को गंभीरता से लिया। हाईकोर्ट ने कहा कि नोटरी की भूमिका केवल दस्तावेज़ों के सत्यापन और प्रमाणीकरण तक सीमित है। विवाह संपन्न कराना या उसका प्रमाणपत्र जारी करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। अदालत ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश भी दिए। साथ ही संबंधित नोटरी की भूमिका और संभावित अनियमितताओं की जांच करने को कहा गया। फैसले में कानूनी प्रक्रिया के पालन और अधिकारों के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया गया। यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।

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