पाकिस्तान के एक राजनेता ने देश की सेना पर ताजा टिप्पणी की है। उन्होंने सेना की ताकत का जिक्र करते हुए 1971 की घटना की याद दिलाई। नेता ने सवाल उठाया कि ताकत के बावजूद इतिहास से सबक लेना जरूरी है। उनकी टिप्पणी को पाकिस्तानी सेना पर परोक्ष राजनीतिक हमला माना जा रहा है। 1971 का संदर्भ पाकिस्तान के इतिहास में बेहद संवेदनशील माना जाता है। इसी वर्ष पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर बांग्लादेश बना था। राजनेता की टिप्पणी के बाद सेना की भूमिका और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। पाकिस्तान में सेना का राजनीतिक प्रभाव लंबे समय से बहस का विषय रहा है। इस बयान को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। नेता ने सेना की शक्ति पर सवाल उठाने के बजाय उसके इतिहास की ओर ध्यान खींचा। उनकी टिप्पणी से देश में नागरिक-सैन्य संबंधों पर बहस फिर उभर सकती है। बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। Source: Source Post navigation 450 किमी की मारक क्षमता वाली AIM-424 मिसाइल से बदल सकता है हवाई युद्ध का भविष्य चीनी ह्यूमनॉइड रोबोट ने 100 मीटर में बनाया नया रिकॉर्ड, क्या मशीनें इंसानों से आगे निकल रही हैं?