इरान का नया सर्वोच्च नेता औपचारिक रूप से अंतिम फ़ैसले का अधिकार रखता है, पर वास्तविक सत्ता का परिदृश्य कहीं अधिक जटिल है। सत्ता के केंद्र में परंपरागत रूप से रही‑रही इस्लामी अति‑परिषद (नमाज़ेत) के कई उच्च पदस्थ रुख़ी, मौजूदा उपराष्ट्रपति, सुरक्षा बलों के वरिष्ठ कमांडर और आर्थिक मंत्रियों की गठबंधन है। अंतर्गत ईरादियों, ‘काउंसिल ऑफ़ गैसलारी’ और विभिन्न रक्षा एजेंसियों की भूमिका भी अक्सर निर्णय‑प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होती है। इसके अलावा, ‘रहस्यवादी सैनिक गुट’ और विदेशों में इरानी प्रवासी नेटवर्क भी नीति‑निर्धारण पर असर डालते हैं। इस जटिल ताने‑बाने में, सार्वजनिक तौर पर एक ही मुखिया दिखने के बावजूद शक्ति का वितरण कई स्तरीय संस्थाओं के बीच बंटा हुआ है, जिससे निर्णय प्रक्रिया को समझना आसान नहीं रहता। Post navigation हरियाणा में बिजली विभाग में कड़ी कार्रवाई: बिना अनुमति ऑफिस छोड़ना बंद मैंडल्सन के खिलाफ ईयू के एंटी-फ़्रॉड कार्यालय ने औपचारिक जाँच शुरू की