भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। सरकारी नीतियों और प्रोत्साहन पैकेजों के प्रभाव से इस अप्रैल में कुल 2.39 लाख ईवी यूनिट्स की बिक्री दर्ज की गई, जो सात साल पहले उसी महीने केवल 981 यूनिट्स के बराबर थी।

फ्लोरिंग एमिशन्स अंडर मोडर्नाइजेशन (FAME) योजना, टैक्स में रियायतें और चार्जिंग स्टेशन के नेटवर्क विस्तार ने खरीदारों के विश्वास को मजबूत किया है। कई प्रमुख निर्माताओं ने देशी और आयातित बैटरी तकनीक को सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराकर उपभोक्ताओं को आकर्षित किया है।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस उछाल के पीछे दो प्रमुख कारण हैं: पहले, बैटरी लागत में निरंतर गिरावट और दूसरे, पर्यावरणीय नियमों की कड़ाई। परिणामस्वरूप, कई पारंपरिक पेट्रोल‑डिज़ल कार खरीदारों ने ईवी की ओर रुख किया है।

उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि अगले दो वर्षों में वार्षिक ईवी बिक्री दो मिलियन यूनिट्स तक पहुँच सकती है, बशर्ते चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और सरकारी समर्थन की गति जारी रहे। इस प्रकार, अप्रैल 2026 भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बन गया है।