इमजा ग्लेशियल झील पर स्थापित बाढ़ चेतावनी प्रणाली को 2016 के बाद से कोई रख‑रखाव नहीं मिला, स्थानीय लोग बीबीसी को बताते हैं कि अब यह जंग पकड़ रहा है। 2015 की विनाशकारी बाढ़ के बाद 20 लाख डॉलर से अधिक खर्च कर बनाई गई इस प्रणाली में जलस्तर मॉनिटरिंग सेंसर, अलार्म और संचार उपकरण शामिल थे, जो बाढ़ आने से पहले सदस्यों को सतर्क कर सकती थी। अब उपकरण धूल‑धूप में ख़त्म हो रहे हैं, सेंसर काम नहीं कर रहे और चेतावनी प्रणाली अप्रचलित हो गई है। इस कारण इमजा घाटी और निकटवर्ती लेकोन, द्रुंग और लुंदुर्ग जैसे गांवों में हजारों लोग बाढ़ के खतरे में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तुरंत मरम्मत या नई प्रणाली नहीं स्थापित की गई तो जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर गति बढ़ने पर बाढ़ का जोखिम अत्यधिक बढ़ जाएगा। स्थानीय प्रशासन और राष्ट्रीय सरकार से इस नाजुक प्रणाली को फिर से सक्रिय करने की माँग बढ़ रही है। Post navigation चीन की कार महाशक्ति BYD कहती है, वह बिना US के भी सफल बन सकती है यूरोपीय नेता रूस की नज़र में आते हुए अर्मेनिया में एकत्रित हुए