पश्चिमी यूरोप के दो बड़े शिखर सम्मेलनों का मंचन अर्मेनिया में हो रहा है, जो इस क्षेत्र में रूसी सहयोगी के रूप में जानी जाती है। बुखारते यूरोपीय नेताओं ने आर्थिक सहयोग, सुरक्षा और ऊर्जा प्रबंधन पर चर्चा करने के लिए इस छोटे लेकिन रणनीतिक देश को अपने मेज़बान के रूप में चुना है। इस बीच, मॉस्को अपनी मौन, लेकिन सतर्क नज़रें इस दौर पर रखे हुए है, यह देख रहा है कि यूरोपीय हस्तक्षेप अर्मेनिया के लिए कितनी दूर तक पहुंचता है। सम्मेलनों में यूरोपीय संघ के प्रमुख, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधि और कुछ राष्ट्रीय सरकारों के नेता शामिल हैं, जो एषियाई-यूरोपीय पुल को मजबूत करने, क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने और अर्मेनिया में निवेश बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। रूस का यह नज़रिया दोनों ओर के राजनयिक खेल को एक नई जटिलता प्रदान कर रहा है, जिससे यह सवाल उठता है कि भविष्य में इस गठबंधन के पीछे कौन-से सामरिक हित छिपे हैं। Post navigation ईवरेस्ट की बहु‑मिलियन‑डॉलर बाढ़ चेतावनी प्रणाली जंगली, हजारों लोग दांव पर पुरुषों ने किया ‘मास्कुलिनिटी’ रुझानों पर सवाल