भारतीय रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरावट दर्ज की गई और यह 12 पैसे टूटकर 94.50 के स्तर पर बंद हुआ। रुपये पर दबाव की प्रमुख वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी रही। तेल की बढ़ती कीमतों से भारत के आयात बिल और मुद्रा बाजार पर दबाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि, अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ने रुपये को कुछ राहत दी। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट से भी भारतीय मुद्रा को आंशिक समर्थन मिला। इसके बावजूद घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और महंगे कच्चे तेल ने रुपये की स्थिति को प्रभावित किया। दलाल स्ट्रीट पर कारोबार के दौरान शेयर बाजार में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला। वैश्विक बाजारों के संकेत और तेल की कीमतों में बदलाव निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। इस बीच, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हाल में भारतीय शेयरों में 1,022.32 करोड़ रुपये का निवेश किया। विदेशी निवेशकों की खरीदारी के बावजूद रुपये पर दबाव पूरी तरह कम नहीं हुआ। मुद्रा बाजार में आगे की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर कर सकती है। निवेशक इन कारकों के साथ घरेलू शेयर बाजार की गतिविधियों पर भी नजर बनाए हुए हैं।

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