दिव्य सत्संग महोत्सव का शुभारंभ बड़ी धर्मशाला मोहल्ला नं. 3 कैंट में क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में किया गया। यह आयोजन 27 मई तक चलेगा। महोत्सव मेंे पुरुष सफेद वस्त्रों तो महिलाएं लाल वस्त्रों में पहुंचीं। दिव्य सत्संग महोत्सव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जो महापुरुषों की कथा सुनता है वह भी एक दिन महापुरुष बन जाता है। तीर्थंकर और अवतारों का जन्म जब पृथ्वी पर पाप और अत्याचार चरम सीमा पर पहुंच जाते हैं उन्हें समाप्त करने के लिए इस पृथ्वी पर जन्म लेते हैं। सृष्टि के प्रारंभ में तीर्थंकर आदि कुमार ने अपने 100 पुत्रों के नाम से 100 राज्यों की स्थापना की एवं दोनों पुत्री के नाम से कन्याकुमारी राज्य की स्थापना की। विद्या का प्रारंभ उन्होंने पुत्रों से नहीं पुत्री को प्रदान करके किया। पुत्र और पुत्रियां समान अधिकार शिक्षा के क्षेत्र में प्राप्त कर सकें इसका संकेत ऋषभदेव ने सृष्टि के प्रारंभ में दिया। संध्याकालीन समय में द्वितीय सत्र दिव्य सत्संग महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि गर्भपात करना अच्छी बात नहीं। गर्भपात वह पाप है जो हाथों में मेहंदी लगा करके भी उस खून को छुपा नहीं सकता। किसी के मरने पर परिवार वालों को 13 दिन का पाठक लगता है जिसमें वह कोई धार्मिक कार्य नहीं कर सकते हैं मेरा मानना है कि जिस घर में गर्भपात करवाया गया है उसे घर में रहने वाले लोगों को जीवन भर का पाठक लगना चाहिए। इस अवसर पर महिलाओं द्वारा डांडिया रास का कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। सोमवार को सुबह 8 से 10 तो शाम 6:30 से 8 बजे तक समागम होगा।

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