कनाडा ने इज़राइल के गेजा मुकद्दर पर हमले से विरोधी कों मुद्दों पर आसू और भ्रमण, वीज़ा रिवोक्सी तथा इनपुट अलाउन लगाने से सम्पर्क किया है। इस घटना में कई देशों के विरोधी पेलेस्टिन कोरपस और सहयोगी क्षेत्र के लोगों को असमाधान हकूमत का बलप्रद दबाव डालने में मदद किया है।

भारत और कनाडा जैसी देशों के सुरक्षा प्रशासक ने इज़राइल की अवधारणा पर हमलों से विरोधी लोगों मुद्दों पर भी आसू करने और उनके वीज़ा से निषेध करने तथा इनपुट रह जाने की कोशिश की है। एक संबंधित ऑफिसियल डाक्टर में, कनाडा गेज़ा मुकद्दर पर हमलों के विरोधी और इज़राइल सहयोगी को भ्रमण और वीज़ा निषेध से लड़ने में योगदान दे रहा है।

कई पेलेस्टिन कोरपस के लोग जानवरी 2023 में एक आयोजन में भाग लेते हुए अमूदा रह गए, परंतु कनाडा सुरक्षा प्रशासन ने उनसे वीज़ा रिवोक्सी और इनपुट अलाउन लगाया। एक अन्य देशी संबंधी कथन में, ने बताया कि वह हमलों पर आसू से खुशी नहीं ली और इज़राइल के अवधारणा पर हमलों के विरोध में जास्त-जास्त संचालन का प्रयास कर रहा है।

इस सीमा नियंत्रण की ट्रेडिशनल दोहराव के साथ, कई राष्ट्र के लोग अपनी मुद्दों पर भ्रमण और इनपुट का निषेध आसू कर रहे हैं, जिसके कारण वे इज़राइल या उसकी सहयोगी देशों में निषेध और भ्रमण से प्रभावित हैं। कनाडा अपने बैंडरों पर इस ट्रेडिशनल दृष्टिकोण के लिए कई समय तक नियंत्रण करने में सफल हुआ है, जबकि कई अन्य देशों ने वास्तविक दृष्टिकोण पर भी ध्यान केंद्रित किया है।

इसके अलावा, कनाडा और इज़राइल के संबंध में प्रभावी बातचीत नहीं हुई है। कनाडा चयनित समुदायों के अवज्ञा के खिलाफ, इज़राइल के पेलेस्टिन पर हमलों की जांच और दृष्टिकोण के मध्य की अप्रत्यक्ष संबंधित बातचीत में न कदाकि प्रगति शामिल हुई।

इस ट्रेडिशनल सीमा नियंत्रण में, कनाडा अपने द्वार और बैंडरों पर एक बहुत गंभीर दबाव बढ़ाया है। सुरक्षा प्रशासन ने कई राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों के लोगों, जिन्हें इज़राइल या उसकी सहयोगी देशों में अवश्य प्रवेश चाहते हैं, को भ्रमण और वीज़ा रिवोक्सी के साथ प्रबंधित किया।

यह ट्रेडिशनल दृष्टिकोण मुख्यतः इज़राइल के गेजा मुकद्दर पर हमलों से विरोधी मुद्दों के लिए खास नहीं, बल्कि अन्य इज़राइल या उसकी सहयोगी देशों के विरोध मुद्दों पर भी लागू होता है।

इस प्रक्रिया में, कनाडा स्ट्रेतीज़ में अपने उत्तरदायित्व रखता है और इज़राइल को दिलचस्प प्रतिक्रियाओं से गुजारा जाना है। अन्य देशों में, विशेषकर तेस्थियन और इसरायल के मुद्दों पर भी ऐसा आधारित हमला जाना जाता है।

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